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Wednesday, July 31, 2019

Wala si Dad Tara Sex Tayo porncenity - xstoryhindi

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सीमा और उसकी बेटी की चुदाई-1 (Seema Aur Uski Beti Ki Chudai-1) -Xstoryhindi

मैं अपना परिचय दे दूँ, मेरा नाम विमल खुराना है, उम्र ५२ साल, कद ५’-१०”, रंग गोरा और बदन गठीला है। मैं स्टेट बैंक में मैनेजर हूँ, मेरे घर में मेरी पत्नी और दो बेटे हैं, जो कक्षा ८ और १० में पढ़ते हैं।
बात लगभग एक साल पहले की है जब मेरा तबादला आगरा से जयपुर हुआ तो पत्नी और बच्चों को आगरा में ही छोड़कर मैं अकेले जयपुर आ गया। जयपुर में मैंने जो मकान किराये पर लिया उसके मालिक का नाम था मूल चंद मनवानी, उसकी उम्र लगभग ५४ साल, कद ५’-६”, रंग गोरा और बदन ढीला ढाला, पेशा जूते की दुकान। उसके घर में उसकी पत्नी सीमा, उम्र लगभग ५० साल, कद ५’-५”, रंग गोरा और बदन भरा-पूरा। खंडहर बताते थे इमारत कभी बुलंद थी। इनकी एक लड़की पायल थी जिसकी उम्र करीब अट्ठारह-उन्नीस साल, कद ५’-५”, रंग गुलाबी और बदन अपनी मां की तरह भरापूरा था, एक नज़र में फिल्म स्टार ममता कुलकर्णी लगती थी।
मैं सुबह नहा धोकर निकलता, रेस्तरां में नाश्ता करता और बैंक चला जाता, दोपहर का खाना टिफन वाला बैंक में दे जाता और रात को होटल में खाता था।
इस तरह दिन कट रहे थे कि एक दिन मूल चंद जी बोले- खुराना साब, क्यूँ होटल बाज़ी करते हैं, यहीं घर में खाया कीजिये।
मेरे मना करने पर बोले- जो मुनासिब हो, पैसे दे दिया करिए, यानी आप किरायेदार से पेइंग गेस्ट बन जाइए। मुझे भी ठीक लगा और मैं उनके घर मैं खाने लगा। उनके घर खाना खाने से हुआ यह कि मैं सीमा की तरफ आकर्षित होने लगा और उसको चोदने की सोचने लगा।
एक दिन मैंने बैंक से छुट्टी ली और सिरदर्द का बहाना बनाकर घर मैं लेटा रहा।
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जब नाश्ता करने उनके घर नहीं गया तो मूल चंद और पायल के जाने के बाद सीमा आई और पूछा- आज आप नाश्ता नहीं करेंगे क्या?
मैंने बताया- तबियत खराब है !
तो बोली- मैं चाय बनाकर लाती हूँ !
मैंने कहा- चाय ना लाइये, कोई बाम हो तो ले आइये !
वो गई और बाम ले आई तथा मेरे कहने पर मेरे माथे पर मलने लगी। दोनों के शरीर करीब आये साँसे मिलने लगीं तो मैंने पहल की और उसने भी विरोध नहीं किया, हम दोनों नंगे हो गए और मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर चला गया। उस दिन से लगभग रोज़ हमारा प्रोग्राम बन जाता।
एक दिन मैं उसको चोद रहा था, कमरे का दरवाजा बंद था, खिड़की का पर्दा लगा था, मुझे एहसास हो गया कि पायल आ गई है और खिड़की के बाहर से अन्दर के माहौल का अंदाज़ लगा रही है।
उसको सुनाने के उद्देश्य से मैंने सीमा से पूछा- सीमा जब मेरा लंड तुम्हारी चूत के अन्दर बाहर होता है तो मज़ा आता है?
तो बहुत सेक्सी आवाज में सीमा ने कहा- राजा इतना मज़ा इससे पहले कभी नहीं आया !
सीमा को चोदते हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ था कि उसकी बेटी पायल यह जान गई थी कि मैं उसकी माँ सीमा को चोदता हूँ। हालाँकि सीमा को यह नहीं मालूम था कि पायल यह सब जानती है। मेरा ध्यान अब कच्ची कली को फूल बनाने पर लगा हुआ था। जल्दी ही भगवान ने मेरी सुन ली, सीमा का मायका अलवर में था और उसकी माँ की तबियत खराब होने की खबर आई तो वह एक हफ्ते के लिए अलवर चली गई, जाते समय मुझसे बोली- तुम्हें बहुत मिस करूंगी !
मैंने मुस्कुरा कर कहा- मैं भी !
उसके जाने के बाद मैं नाश्ता करने गया तो पायल से इधर उधर की बातें होने लगीं। मैं उसकी झिझक दूर करना चाहता था। बातों बातों में उसने बताया कि परसों मेरा जन्मदिन है और मैं १८ साल की हो जाऊंगी।
मैंने पूछा- तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हें क्या तोहफ़ा दूं ?
बोली- कुछ नहीं !
मैं जानता था कि मूल चंद बहुत कंजूस टाइप का आदमी है और परिवार पर ज्यादा खर्च नहीं करता है। मैंने कहा- रात को जब तुम्हारे पापा आ जायेंगे तो उनसे बात करूंगा और कल तुमको मार्केट ले जाऊंगा, एक सुन्दर सा सूट दिलाऊँगा।
मेरी बात सुनकर बहुत खुश हो गई। मैं नाश्ता कर चुका था इसलिए उठा और बैंक चला गया। रात को खाने के समय मैंने मूल चंद से कहा- परसों पायल का जन्मदिन है और मैं इसे एक सूट उपहार में देना चाहता हूँ, अगर आपकी इजाज़त हो तो कल इसको मार्केट से दिलवा दूं?
मूल चंद लालची तो था ही, हल्की सी मनाही के बाद बोला- जो आपकी मर्ज़ी !
खाना खाकर मैं अपने कमरे में आ गया और आगे की योजना बनाने लगा। सुबह मूल चंद के जाने के बाद मैं नाश्ता करने गया तो मैंने पायल से कहा- ११ बजे तक तैयार हो जाना, मार्केट चलेंगे, पिक्चर देखेंगे और वहीं खाना खायेंगे ! पायल के चेहरे और मेरे लंड की रौनक देखने लायक हो रही थी।
मैं बैंक गया और बहाना बनाकर ११ बजे वापस आ गया, पायल तैयार थी, गज़ब ढा रही थी। हम लोगों ने पहले सूट ख़रीदा, फिर उसकी झिझक खोलते हुए उसको ब्रा और पैंटी भी दिलवा दी। इसके बाद हम लोग पिक्चर देखने लगे। इंटरवल तक हम लोग आराम से बैठे रहे, इंटरवल में पोपकोर्न लिए, खाते खाते पिक्चर शुरू हो गई। अब पोपकोर्न लेने के चक्कर में हमारे हाथ छुए तो शुरुआत हो गई। पोपकोर्न खत्म होने के बाद मैंने उसका हाथ पकड़ा, कुछ नहीं बोली तो मैंने उसका हाथ सहलाना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में मेरा लंड एकदम टाइट हो गया तो मैंने पायल का हाथ अपने लंड पर रख दिया और अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा तथा सहलाने लगा।
मैंने उससे कहा- तुम भी सहलाओ ! तो वह मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी। मैंने अपना दूसरा हाथ उसके मम्मे पर रखा और हल्के-हल्के दबाने लगा। इसी समय पिक्चर खत्म हो गई और हम खाते पीते घर आ गए। आज पहला दिन था और उसे खाना भी बनाना था, इसलिए घर आकर हमने कुछ नहीं किया। वह अपने घर चली गई और मैं अपने कमरे में ! मैंने बाथरूम जाकर मुठ मारी, अपने लंड को ठंडा किया और सो गया।
रात को करीब १० बजे मूल चंद की आवाज से नींद खुली, सबने एक साथ खाना खाया। खाने के दौरान पायल की भूखी प्यासी आँखें मुझे और मेरी आँखें उसे देखती रहीं। मूल चंद तो १५००/- का सूट देखकर गीला हो गया था।
अगले दिन सुबह सोकर उठा तो पहला काम पायल को फ़ोन करके हैप्पी बर्थडे कहा।
बोली- थैंक्यू !
तो मैंने कहा- पायल, आई लव यू !
शर्माते हुए बोली- आई लव यू टू !
रास्ता साफ़ था, बस मूल चंद के दुकान जाने की देर थी, मुझे मालूम था कि आज १८ साल की नई नवेली चूत मिलने वाली है, मैं भी डाबर शिलाजीत गोल्ड के २ कैप्सूल खाकर अपनी जवानी में चार चाँद लगा चुका था। मूल चंद को दुकान गए १० मिनट हो गए तो मैं पायल के कमरे की तरफ गया, कमरा अन्दर से बंद था, आवाज़ देने के २ मिनट बाद दरवाज़ा खुला तो मैं गश खाकर गिरने वाला था, मेरी दुल्हन पायल मनवानी गुलाबी रंग के नए सूट में बिजली गिरा रही थी। मैं कमरे के अन्दर गया तो उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। मैंने अपनी बाहें फैलाईं तो चली आई।
मैंने कहा- पायल आज तुम १८ साल की हो गई हो और १८ साल की लड़की को सरकार इजाज़त देती है वह जो चाहे कर सकती है, वह चाहे तो नया सूट पहन सकती है और चाहे तो सूट दिलाने वाले को सूट उतारने का मौका दे सकती है, क्या तुम मुझे ये मौका दोगी कि मैं देख सकूं कि तुम नई ब्रा और पैंटी में कैसी लगती हो ?
कुछ नहीं बोली, बस सीने से लग गई, मैंने उसका सूट उतारा फिर थोड़ी देर तक चूमने चाटने के बाद ब्रा और पैंटी भी उतार दी, उसे गोद में उठाया और बेड पर ले आया। बेड पर लिटाते ही अपने होंठ उसकी चूत पर रखे तो उसे करंट सा लगा, मुझे लगा लोहा गरम है, अपने कपड़े उतारे, जेब से कंडोम निकालकर अपने तन्नाये हुए लंड पर चढ़ाया और लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखते हुए कहा- पायल डार्लिंग ! यह रहा तुम्हारा असली बर्थडे गिफ्ट !
पहले झटके में आधा और दूसरे झटके में पूरा लंड उसकी चूत में समा गया, थोड़ा सा कसमसाई लेकिन झेल गई।
अब मेरा लंड उसकी चूत में था और उसका एक मम्मा मेरे मुंह में तथा दूसरा मेरे हाथ में था। आधे घंटे से ज्यादा देर तक चोदने के बाद जब मेरे लंड से पिचकारी छूटी तो भूचाल आ गया। अपना लंड जब उसकी चूत से निकाला तो चादर पर फैला खून देखकर एक बार तो मैं घबरा गया लेकिन पायल का सुकून भरा चेहरा देखकर राहत की सांस ली। हम दोनों बाथरूम गए मिलकर नहाए और बेड पर आ गए।
कुछ देर बाद मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लेकर उसके होठों को चूसना शुरू किया और उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया जिसे वह सहलाने लगी। थोड़ी देर में लंड खडा हो गया तो मैंने पोजीशन बनाकर लंड उसके मुंह में दे दिया. कुछ देर बाद उसने मुंह से मेरा लंड निकाला और मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया, मैं समझ गया चुदासी है !
मैंने जेब से दूसरा कंडोम निकाला, लंड पर चढ़ा कर लंड उसके हाथ में दे दिया, उसने लंड को अपनी चूत पर रखा और मुझे अपने ऊपर खींच लिया। उस दिन मैंने उसको चार बार चोदा और सीमा के आने तक यह कार्यक्रम चलता रहा।
सीमा के आने के बाद कहानी में कहाँ मोड़ आया, यह अगले भाग में….
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Thursday, June 6, 2019

एक औरत की आत्मकथा part -2 Biography of a lady

प्रगति को मानो करंट लग गया.वह उछल गई। शेखर ने उसके मटर को खूब चखा। प्रगति की चूत में पानी आने लगा और वह आपे से बाहर होने लगी। यह देखकर शेखर फिर पूरे जोश के साथ चोदने लगा। पांच-छः छोटे धक्के और दो लम्बे धक्कों का सिलसिला शुरू किया। एक ऊँगली उसने प्रगति की गांड में घुसा दी एक अंगूठा मटर पर जमा दिया। 

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शेखर को यह अच्छा लग रहा था कि उसे स्खलन का संकेत अभी भी नहीं मिला था। उसे एक नई जवानी का आभास होने लगा। इस अनुभूति के लिए वह प्रगति का आभार मान रहा था। उसी ने उसमें यह जादू भर दिया था। वह बेधड़क उसकी चुदाई कर रहा था।


प्रगति अब चरमोत्कर्ष की तरफ बढ़ रही थी। उसका बदन अपने आप डोले ले रहा था उसकी आँखें लाल डोरे दिखा रही थी, साँसें तेज़ हो रहीं थीं। स्तन उफ़न रहे थे और चूचियां नई ऊँचाइयाँ छू रहीं थीं। उसकी किलकारियां और सिसकियाँ एक साथ निकल रहीं थीं। प्रगति ने शेखर को कस के पकड़ लिया और उसके नाखून शेखर कि पीठ में घुस रहे थे। वह ज़ोर से चिल्लाई और एक ऊंचा धक्का दे कर शेखर से लिपट गई और उसके लंड को चोदने से रोक दिया। उसका शरीर मरोड़ ले रहा था और उसकी आँखों में ख़ुशी के आँसू थे। थोड़ी देर में वह निढाल हो गई और बिस्तर पर गिर गई।



शेखर ने अपना लंड बाहर निकालने की कोशिश की तो प्रगति ने उसे रोक दिया, बोली कि थोड़ी देर रुक जाओ। मैं तो स्वर्ग पा चुकी हूँ पर तुम्हें पूरा आनंद लिए बिना नहीं जाने दूँगी। तुमने मेरे लिए इतना किया तो मैं भी तुम्हें क्लाइमेक्स तक देखना चाहती हूँ। शेखर ने थोड़ी देर इंतज़ार किया। जब प्रगति की योनि थोड़ी शांत हो गई तो उसने फिर से चोदना शुरू किया। उसका लंड थोड़ा आराम करने से शिथिल हो गया था तो शेखर ने ऊपर सरक कर अपना लंड प्रगति के मम्मों के बीच में रख कर रगड़ना शुरू किया। कुछ देर बाद प्रगति ने शेखर को अपने तरफ खींच कर उसका लंड लेटे लेटे अपने मुँह में ले लिया और जीभ से उसे सहलाने लगी।



बस फिर क्या था। वह फिर से जोश में आने लगा और देखते ही देखते अपना विकराल रूप धारण कर लिया। शेखर ने मुँह से निकाल कर नीचे खिसकते हुए अपना लंड एक बार फिर प्रगति की चूत में डाल दिया और धीरे धीरे चोदने लगा। उसकी गति धीरे धीरे तेज़ होने लगी और वार भी पूरा लम्बा होने लगा। प्रगति भी साथ दे रही थी और बीच बीच में अपनी टांगें जोड़ कर चूत तंग कर लेती थी। शेखर ने अपने शरीर को प्रगति के सिर की तरफ थोड़ा बढ़ा लिया जिससे उसका लंड घर्षण के दौरान प्रगति के मटर के साथ रगड़ रहा था। 



यह प्रगति के लिए एक नया और मजेदार अनुभव था। उसने अपना सहयोग और बढ़ाया और गांड को ज़ोर से ऊपर नीचे करने लगी। अब शेखर को उन्माद आने लगा और वह नियंत्रण खोने लगा। उसके मुँह से अचानक गालियाँ निकलनी लगीं,” साली अब बोल कैसा लग रहा है? … आआअह्ह्ह्हाअ अब कभी किसी और से मराएगी तो तेरी गांड मार दूंगा …. आह्हा कैसी अच्छी चूत है !! ….. मज़ा आ गया …. साली गांड भी मराती है क्या? ….. मुझसे मरवाएगी तो तुझे पता चलेगा ….. ऊओह .”


कहते हैं जब इंसान चरमोत्कर्ष को पाता है तो जानवर हो जाता है। कुछ ऐसा ही हाल शेखर का हो रहा था। वह एक भद्र अफसर से अनपढ़ जानवर हो गया था। थोड़ी ही देर में उसके वीर्य का गुब्बारा फट गया और वह ज़ोर से गुर्रा के प्रगति के बदन पर गिर गया और हांफने लगा। उसका वीर्य प्रगति की योनि में पिचकारी मार रहा था। शेखर क्लाइमेक्स के सुख में कंपकंपा रहा था और उसका फव्वारा अभी भी योनि को सींच रहा था। कुछ देर में वह शांत हो गया और शव की भांति प्रगति के ऊपर पड़ गया।



शेखर ने ऐसा मैथुनी भूकंप पहले नहीं देखा था। वह पूरी तरह निढाल और निहाल हो चुका था। उधर प्रगति भी पूरी तरह तृप्त थी। उसने भी इस तरह का भूचाल पहली बार अनुभव किया था। दोनों एक दूसरे को कृतज्ञ निगाहों से देख रहे थे। शेखर ने प्रगति को प्यार भरा लम्बा चुम्बन दिया। अब तक उसका लिंग शिथिल हो चुका था अतः उसने बाहर निकाला और उठ कर बैठ गया। प्रगति भी पास में बैठ गई और उसने शेखर के लिंग को झुक कर प्रणाम किया और उसके हर हिस्से को प्यार से चूमा।



शेखर ने कहा- और मत चूमो नहीं तो तुम्हें ही मुश्किल होगी।


प्रगति बोली कि ऐसी मुश्किलें तो वह रोज झेलना चाहती है। यह कह कर उसने लंड को पूरा मुँह में लेकर चूसा मानो उसकी आखिरी बूँद निकाल रही हो। उसने लंड को चाट कर साफ़ कर दिया और फिर खड़ी हो गई।



घड़ी में शाम के छः बज रहे थे। उन्होंने करीब छः घंटे रति-रस का भोग किया था। दोनों थके भी थे और चुस्त भी थे। प्रगति शेखर को बाथरूम में ले गई और उसको प्यार से नहलाया, पौंछा और तैयार किया। फिर खुद नहाई और तैयार हुई। शेखर के लिंग को पुच्ची करते हुए उसने शेखर को कहा कि अब यह मेरा है। इसका ध्यान रखना। इसे कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। मैं चाहती हूँ कि यह सालों तक मेरी इसी तरह आग बुझाये।



शेखर ने उसी अंदाज़ में प्रगति की चूत और गांड पर हाथ रख कर कहा कि यह अब मेरी धरोहर हैं। इन्हें कोई और हाथ ना लगाये। प्रगति ने विश्वास दिलाया कि ऐसा ही होगा पर पूछा की गांड से क्या लेना देना? शेखर ने पूछा कि क्या अब तक उसके पति ने उसकी गांड नहीं ली?

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प्रगति ने कहा- नहीं ! उनको तो यह भी नहीं पता कि यह कैसे करते हैं।



शेखर ने कहा कि अगर तुम्हे आपत्ति न हो तो मैं तुम्हें सिखाऊंगा। प्रगति राजी राजी मान गई। शेखर ने अगले शुक्रवार के लिए तैयार हो कर आने को कहा और फिर दोनों अपने अपने घर चले गए।



शेखर अब अगले शुक्रवार की तैयारी में जुट गया। वह चाहता था कि अगली बार जब वह प्रगति के साथ हो तो वह अपनी सबसे पुरानी और तीव्र इच्छा को पूरा कर पाए।



उसकी इच्छा थी गांड मारने की। वह बहुत सालों से इसकी कोशिश कर रहा था पर किसी कारण बात नहीं बन रही थी।



उसे ऐसा लगा कि शायद प्रगति उसे खुश करने के लिए इस बात के लिए राज़ी हो जायेगी। उसे यह भी पता था कि उसकी यह मुराद इतने सालों से पूरी इसलिए नहीं हो पाई थी क्योंकि इस क्रिया मैं लड़की को बहुत दर्द हो सकता है इसीलिए ज्यादातर लड़कियाँ इसके खिलाफ होती हैं। उनके इस दर्द का कारण भी खुद आदमी ही होते हैं, जो अपने मज़े में अंधे हो जाते हैं और लड़की के बारे में नहीं सोचते।



शेखर को वह दिन याद है जब वह सातवीं कक्षा में था और एक हॉस्टल में रहता था। तभी एक ग्यारहवीं कक्षा के बड़े लड़के, हर्ष ने उसके साथ एक बार बाथरूम में ज़बरदस्ती करने की कोशिश की थी तो शेखर को कितना दर्द हुआ था वह उसे आज तक याद है।



शेखर चाहता था कि जब वह अपनी मन की इतनी पुरानी मुराद पूरी कर रहा हो तब प्रगति को भी मज़ा आना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो न केवल उसका मज़ा दुगना हो जायेगा, हो सकता है प्रगति को भी इसमें इतना मज़ा आये की वह भविष्य में भी उससे गांड मरवाने की इच्छा जताए।



शेखर को पता था कि गांड में दर्द दो कारणों से होता है। एक तो चूत के मुकाबले उसका छेद बहुत छोटा होता है जिससे लंड को प्रवेश करने के लिए उसके घेरे को काफी खोलना पड़ता है जिसमें दर्द होता है। दूसरा, चूत के मुकाबले गांड में कोई प्राकृतिक रिसाव नहीं होता जिस से लंड के प्रवेश में आसानी हो सके। इस सूखेपन के कारण भी लंड के प्रवेश से दर्द होता है। यह दर्द आदमी को भी हो सकता है पर लड़की (या जो गांड मरवा रहा हो) को तो होता ही है।



भगवान ने यह छेद शायद मरवाने के लिए नहीं बनाया था !!!



शेखर यही सोच रहा था कि इस क्रिया को किस तरह प्रगति के लिए बिना दर्द या कम से कम दर्द वाला बनाया जाए।



उसे एक विचार आया। उसने एक बड़े आकार की मोमबत्ती खरीदी और चाकू से शिल्पकारी करके उसे एक मर्द के लिंग का आकार दे दिया। उसने यह देख लिया कि इस मोम के लिंग में कहीं कोई खुरदुरापन या चुभने वाला हिस्सा नहीं हो।



उसने जानबूझ कर इस लिंग की लम्बाई ९-१० इंच रखी जो कि आम लंड की लम्बाई से ३-४ इंच ज्यादा है और उसका घेरा आम लंड के बराबर रखा। उसने मोम के लिंग का नाम भी सोच लिया। वह उसे “बलराम” बुलाएगा !



उसने बाज़ार से एक के-वाई जेली का ट्यूब खरीद लिया। वैसे तो प्रगति के बारे में सोच कर शेखर को जवानी का अहसास होने लगा था फिर भी एहतियात के तौर पर उसने एक पत्ती तडालफ़िल की गोलियों की खरीद ली जिस से अगर ज़रुरत हो तो ले सकता है। वह नहीं चाहता था कि जिस मनोकामना की पूर्ति के लिए वह इतना उत्सुक है उसी की प्राप्ति के दौरान उसका लंड उसे धोखा दे जाये। एक गोली के सेवन से वह पूरे २४ घंटे तक “बलराम” की बराबरी कर पायेगा।

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अब उसने अपने हाथ की सभी उँगलियों के नाखून काट लिए और उन्हें अच्छे से फाइल कर लिया। एक बैग में उसने “बलराम”, के-वाई जेली का ट्यूब, एक छोटा तौलिया और एक नारियल तेल की शीशी रख ली। अब वह प्रगति से मिलने और अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए तैयार था। बेसब्री से वह अगले शुक्रवार का इंतज़ार करने लगा।


उधर प्रगति भी शेखर के ख्यालों में गुम थी। उसे रह रह कर शेखर के साथ बिताये हुए पल याद आ रहे थे। वह जल्द से जल्द फिर से उसकी बाहों में झूलना चाहती थी। शेखर से मिले दस दिन हो गए थे। उस सुनहरे दिन के बाद से वे मिले नहीं थे। शेखर को किसी काम से कानपुर जाना पड़ गया था। पर वह कल दफ्तर आने वाला था।



प्रगति सोच नहीं पा रही थी कि अब दफ्तर में वह शेखर से किस तरह बात करेगी या फिर शेखर उस से किस तरह पेश आएगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि आम आदमियों की तरह वह उसकी अवहेलना करने लगेगा। कई मर्द जब किसी लड़की की अस्मत पा लेते हैं तो उसमें से उनकी रुचि हट जाती है और कुछ तो उसे नीचा समझने लगते हैं ….। प्रगति कुछ असमंजस में थी ….।



लालसा, वासना, डर, आशंका, ख़ुशी और उत्सुकता का एक अजीब मिश्रण उसके मन में हिंडोले ले रहा था।



प्रगति ने सुबह जल्दी उठ कर विशेष रूप से उबटन लगा कर देर तक स्नान किया। भूरे रंग की सेक्सी पैंटी और ब्रा पहनी जिसे पहन कर ऐसा लगता था मानो वह नंगी है। उसके ऊपर हलके बैंगनी रंग की चोली के साथ पीले रंग की शिफोन की साड़ी पहन कर वह बहुत सुन्दर लग रही थी। बालों में चमेली का गजरा तथा आँखों में हल्का सा सुरमा। चूड़ियाँ, गले का हार, कानों में बालियाँ और अंगूठियाँ पहन कर ऐसा नहीं लग रहा था कि वह दफ्तर जाने के लिए तैयार हो रही हो। प्रगति मानो दफ्तर भूल कर अपनी सुहाग रात की तैयारी कर रही थी।



सज धज कर जब उसने अपने आप को शीशे में देखा तो खुद ही शरमा गई। उसके पति ने जब उसे देखा तो पूछ उठा- कहाँ कि तैयारी है …?



प्रगति ने बताया कि आज दफ्तर में ग्रुप फोटो का कार्यक्रम है इसलिए सब को तैयार हो कर आना है !! रोज़ की तरह उसका पति उसे मोटर साइकिल पर दफ्तर तक छोड़ कर अपने काम पर चला गया। प्रगति ने चलते वक़्त उसे कह दिया हो सकता है आज उसे दफ्टर में देर हो जाये क्योंकि ग्रुप फोटो के बाद चाय-पानी का कार्यक्रम भी है।



दफ्तर १० बजे शुरू होता था पर प्रगति ९.३० बजे पहुँच जाती थी क्योंकि उसे छोड़ने के बाद उसके पति को अपने दफ्तर भी जाना होता था। प्रगति ने ख़ास तौर से शेखर का कमरा ठीक किया और पिछले १० दिनों की तमाम रिपोर्ट्स और फाइल करीने से लगा कर शेखर की मेज़ पर रख दी।



कुछ देर में दफ्तर के बाकी लोग आने शुरू हो गए। सबने प्रगति की ड्रेस की तारीफ़ की और पूछने लगे कि आज कोई ख़ास बात है क्या?



प्रगति ने कहा कि अभी उसे नहीं मालूम पर हो सकता है आज का दिन उसके लिए नए द्वार खोल सकता है !!!



लोगों को इस व्यंग्य का मतलब समझ नहीं आ सकता था !!



वह मन ही मन मुस्कराई ….



ठीक दस बजे शेखर दफ्तर में दाखिल हुआ। सबने उसका अभिनन्दन किया और शेखर ने सबके साथ हाथ मिलाया। जब प्रगति शेखर के ऑफिस में उस से अकेले में मिली शेखर ने ऐसे बर्ताव किया जैसे उनके बीच कुछ हुआ ही न हो। वह नहीं चाहता था कि दफ्तर के किसी भी कर्मचारी को उन पर कोई शक हो। प्रगति को उसने दफ्तर के बाद रुकने के लिए कह दिया जिस से उसके दिल की धड़कन बढ़ गई।

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किसी तरह शाम के ५ बजे और सभी लोग शेखर के जाने का इंतजार करने लगे। शेखर बिना वक़्त गँवाए दफ्तर से घर की ओर निकल पड़ा। शीघ्र ही बाकी लोग भी निकल गए। प्रगति यह कह कर रुक गई कि उसे एक ज़रूरी फैक्स का इंतजार है। उसके बाद वह दफ्तर को ताला भी लगा देगी और चली जायेगी।



उसने चौकीदार को भी छुट्टी दे दी। जब मैदान साफ़ हो गया तो प्रगति ने शेखर को मोबाइल पर खबर दे दी। करीब आधे घंटे बाद शेखर दोबारा ऑफिस आ गया और अन्दर से दरवाज़ा बंद करके दफ्टर की सभी लाइट, पंखे व एसी बंद कर दिए। सिर्फ अन्दर के गेस्ट रूम की एक लाइट तथा एसी चालू रखा।

अब उसने प्रगति को अपनी ओर खींच कर जोर से अपने आलिंगन में ले लिया और वे बहुत देर तक एक दूसरे के साथ जकड़े रहे। सिर्फ उनके होंठ आपस में हरकत कर रहे थे और उनकी जीभ एक दूसरे के मुँह की गहराई नाप रही थी। थोड़ी देर में शेखर ने पकड़ ढीली की तो दोनों अलग हुए।


घड़ी में ५.३० बज रहे थे। समय कम बचा था इसलिए शेखर ने अपने कपड़े उतारने शुरू किये पर प्रगति ने उसे रोक कर खुद उसके कपड़े उतारने लगी। शेखर को निर्वस्त्र कर उसने उसके लिंग को झुक कर पुच्ची की और खड़ी हो गई।



अब शेखर ने उसे नंगा किया और एक बार फिर दोनों आलिंगन बद्ध हो गए। इस बार शेखर का लिंग प्रगति की नाभि को टटोल रहा था। प्रगति ने अपने पंजों पर खड़े हो कर किसी तरह लिंग को अपनी योनि की तरफ किया और अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी कर लीं। शेखर का लिंग अब प्रगति की चूत के दरवाज़े पर था और प्रगति उसकी तरफ आशा भरी नज़रों से देख रही थी। शेखर ने एक ऊपर की तरफ धक्का लगाया और उसका लंड चूत में थोड़ा सा चला गया।



अब उसने प्रगति को चूतड़ से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और प्रगति ने अपने हाथ शेखर की गर्दन के इर्द-गिर्द कर लिए तथा उसकी टांगें उसकी कमर से लिपट गईं। अब वह अधर थी और शेखर खड़ा हो कर उसे अपने लंड पर उतारने की कोशिश कर रहा था। थोड़ी देर में लंड पूरा प्रगति की चूत में घुस गया या यों कहिये कि चूत उसके लंड पर पूरी उतर गई।



प्रगति ने ऊपर नीचे हो कर अपने आप को चुदवाना शुरू किया। उसे बड़ा मज़ा आ रहा था क्योंकि ऐसा आसन उसने पहली बार ग्रहण किया था। कुछ देर के बाद शेखर ने बिना लंड बाहर निकाले प्रगति को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट कर उसको जोर जोर से चोदने लगा। हालाँकि शेखर आज प्रगति की गांड मारने के इरादे से आया था पर काम और क्रोध पर किसका जोर चलता है !!



शेखर २-३ मिनटों में ही बेहाल हो गया और उसकी पिचकारी प्रगति की योनि में छूट गई। शेखर की यही एक कमजोरी थी कि पहली बार उसका काम बहुत जल्दी तमाम हो जाता था। पर दूसरी और तीसरी बार जब वह सम्भोग करता था तो काफी देर तक डटा रह सकता था।



उसने लंड बाहर निकाला और प्रगति को माथे पर पुच्ची करके बाथरूम चला गया। अपना लंड धो कर वह वापस आ गया। प्रगति जब कुछ देर के लिए बाथरूम गई तो शेखर ने एक गोली खा ली। शाम के ६ बज रहे थे। अभी भी उसके पास करीब २ घंटे थे। जब प्रगति वापस आई तो शेखर ने उससे पूछा कि वह कितनी देर और रुक सकती है।



प्रगति ने भी अपने पति से देर से आने की बात कह दी थी सो उसे भी कोई जल्दी नहीं थी। तो शेखर ने सोचा की शायद आज ही उसकी बरसों की मनोकामना पूरी हो जायेगी। उसने प्रगति से पूछा वह उस से कितना प्यार करती है।



प्रगति ने कहा- इम्तिहान ले कर देख लो !!



शेखर ने कहा- कितना दर्द सह सकती हो?



प्रगति ने कहा- जब औरत बच्चे को जन्म दे सकती है तो बाकी दर्द की क्या बात !!



यह सुन कर शेखर खुश हो गया और प्रगति को बिस्तर पर उल्टा लेटने के लिए बोला। प्रगति एक अच्छी लड़की की तरह झट से उलटा लेट गई। शेखर ने उसके पेट के नीचे एक मोटा तकिया लगा दिया जिस से उसकी गांड ऊपर की ओर और उठ गई।



शेखर ने अपने बैग से तेल की शीशी, जेली का ट्यूब, छोटा तौलिया और “बलराम” को निकाला और पास की मेज़ पर रख दिया। प्रगति का मुँह तकिये में छुपा था और शायद उसकी आँखें बंद थीं। वह जानती थी कि क्या होने वाला है और वह शेखर की खातिर कोई भी दर्द सहने के लिए तैयार थी।



शेखर ने नारियल के तेल से प्रगति के चूतड़ों की मालिश शुरू की। प्रगति की मांस पेशियाँ जो कसी हुईं थीं उन्हें धीरे धीरे ढीला किया और उसके बदन से टेंशन दूर करने लगा। उसके हाथ कई बार उसकी चूत के इर्द गिर्द और उसके अन्दर भी आने जाने लगे थे। प्रगति को आराम भी मिल रहा था और मज़ा भी आ रहा था।



इस तरह मालिश करते करते शेखर ने प्रगति की गांड के छेद के आस पास भी ऊँगली घुमाना शुरू किया और अच्छी तरह तेल से गांड को गीला कर दिया। अब उसने अपनी तर्जनी ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश की। ऊँगली गांड में थोड़ी सी घुस गई तो प्रगति थोड़ी सी हिल गई।



शेखर ने पूछा- कैसा लग रहा है?

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तो प्रगति ने कहा- अच्छा !



उसने कहा की अब वह ऊँगली पूरी अन्दर करने की कोशिश करेगा और प्रगति को इस तरह जोर लगाना चाहिए जैसे वह शौच के वक़्त लगाती है। इससे गांड का छेद अपने आप ढीला और बड़ा हो जायेगा। प्रगति ने वैसा ही किया और शेखर की एक ऊँगली उसकी गांड में पूरी चली गई।



शेखर ने कोई और हरकत नहीं की और ऊँगली को कुछ देर अन्दर ही रहने दिया। फिर उसने प्रगति से पूछा- कैसा लग रहा है?



प्रगति ने कहा- ठीक है।



तो शेखर ने धीरे से अपनी ऊँगली बाहर निकाल ली।



अब उसने अपनी ऊँगली पर जेली अच्छी तरह से लगा ली और प्रगति की गांड के बाहर और करीब आधा इंच अन्दर तक अच्छी तरह से जेली मल दी। अब उसने प्रगति से कहा कि जब वह ऊँगली अन्दर की तरफ डालने की कोशिश करे उसी वक़्त प्रगति को शौच वाला जोर लगाना चाहिए। जब दोनों ने ऐसा किया तो ऊँगली बिना ज्यादा मुश्किल के अन्दर चली गई।



शेखर ने ऊँगली अन्दर ही अन्दर घुमाई और बाहर निकल ली। अब उसने अपनी दो उँगलियों पर जेली लगाई और वही क्रिया दोहराई। दो उँगलियों के अन्दर जाने में प्रगति को थोड़ी तकलीफ हुई पर ज्यादा दर्द नहीं हुआ।



शेखर हर कदम पर प्रगति से उसके दर्द के बारे में पूछता रहता था। उसने इसीलिए अपनी उँगलियों के नाखून काट कर फाइल कर लिए थे वरना प्रगति को अन्दर से कट लग सकता था…



एक दो बार जब दो उँगलियों से गांड में प्रवेश की क्रिया ठीक से होने लगी तो उसने दो उँगलियों को गांड के अन्दर घुमाना शुरू किया जिस से गांड का छेद और ढीला हो सके।



इसके बाद उसने “बलराम” को निकाला और उसके अगले ४-५ इंच को अच्छी तरह जेली से लेप दिया। प्रगति की गांड के छेद के इर्द गिर्द और अन्दर भी अच्छे से जेली लगा दी। अब शेखर ने प्रगति की टांगें थोड़ी और चौड़ी कर दी और बलराम को उसकी गांड के छेद पर रख दिया। दूसरे हाथ से वह उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। बलराम का स्पर्श प्रगति को ठंडा लगा और उसकी गांड यकायक टाइट हो गई।



उसने पलट कर देखा तो बलराम को देख कर आश्चर्यचकित रह गई। उसने ऐसा यन्त्र पहले नहीं देखा था। शेखर ने बताया कि इसे उसने खुद ही बनाया है और इसको इस्तेमाल करके वह प्रगति के दर्द को कम करेगा। उसने यह भी बताया कि इस यन्त्र का नाम “बलराम” है। नाम सुन कर प्रगति को हंसी आ गई।



शेखर ने आश्वासन के तौर पर उसकी पीठ थपथपाई और फिर से उलटे लेट जाने को कहा। उसने प्रगति को याद दिलाया की किस तरह (शौच की तरह) उसे अपनी गांड ढीली करनी है जिस से बलराम गांड में जा सके। प्रगति ने सिर हिला कर सहयोग करने का इशारा किया।



अब शेखर ने कहा कि तीन की गिनती पर वह बलराम को अन्दर करेगा। प्रगति तैयार हो गई पर अनजाने में फिर उसकी गांड टाइट हो गई। शेखर ने उसे घबराने से मना किया और उसकी योनि, पीठ तथा चूतड़ों पर प्यार से हाथ सहलाने लगा।



उसने कहा- जल्दबाजी की कोई ज़रुरत नहीं है। अगर तुम तैयार नहीं हो तो किसी और दिन करेंगे।



प्रगति ने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है और मैं तैयार हूँ !

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शेखर ने कहा “ओ के, अब मैं तीन गिनूंगा तुम तीन पर अपनी गांड ढीली करना”।



प्रगति ने चूतड़ हिला कर हाँ का इशारा किया। शेखर ने एक, दो, तीन कहते हुए तीन पर बलराम को गांड के छेद में डालने के लिए जोर लगाया। पर प्रगति की कुंवारी गांड बलराम की चौड़ाई के लिए तैयार नहीं थी सो बलराम अपने निशाने से फिसल गया और जेली के कारण बाहर आ गया। शेखर की हंसी छूट गई और प्रगति भी मुस्करा कर पलट गई।



शेखर ने कहा- कोई बात नहीं, एक बार फिर कोशिश करते हैं।



उसने बलराम के सुपारे पर थोड़ी और जेली लगाई और एक-दो-तीन कह कर फिर से कोशिश की। इस बार बलराम करीब आधा इंच अन्दर चला गया। प्रगति के मुँह से एक हलकी सी आवाज़ निकली।



शेखर ने एकदम बलराम को बाहर निकाल कर प्रगति से पूछा कि कैसा लगा? दर्द बहुत हुआ क्या?



प्रगति ने पलट कर उसके होटों पर एक ज़ोरदार चुम्मी की और कहा- तुम मेरा इतना ध्यान रख रहे हो तो मुझे दर्द कैसे हो सकता है !! अब मेरे बारे में सोचना बंद करो और बलरामजी को अन्दर डालो।



यह सुनकर शेखर का डर थोड़ा कम हुआ और उसने कहा- ठीक है, चलो इस बार देखते हैं तुम में कितना दम है !!


एक बार फिर जेली गांड और बलराम पर लगा कर उसने एक-दो-तीन कह कर थोड़ा ज्यादा ज़ोर लगाया। इस बार बलराम अचानक करीब डेढ़ इंच अन्दर चला गया और प्रगति ने कोई आवाज़ नहीं निकाली। बस एक लम्बी सांस लेकर छोड़ दी। शेखर ने बलराम को अन्दर ही रहने दिया और प्रगति की पीठ सहलाने लगा। उसने प्रगति को शाबाशी दी और कहा वह बहुत बहादुर है।



थोड़ी देर बाद शेखर ने प्रगति को बताया कि अब वह बलराम को बाहर निकालेगा। और फिर धीरे धीरे बलराम को बाहर खींच लिया। उसने प्रगति से पूछा उसे अब तक कैसा लगा तो प्रगति ने कहा कि उसे दर्द नहीं हुआ और थोड़ा मज़ा भी आया।



शेखर ने प्रगति को आगाह किया कि इस बार वह बलराम को और अन्दर करेगा और अगर प्रगति को तकलीफ नहीं हुई तो बलराम से उसकी गांड को चोदने की कोशिश करेगा। प्रगति ने कहा वह तैयार है।



पर शेखर ने एक बार फिर सब जगह जेली का लेप किया और तीन की गिनती पर बलराम को घुमाते हुए उसकी गांड के अन्दर बढ़ा दिया। प्रगति थोड़ा कसमसाई क्योंकि बलरामजी इस बार करीब चार इंच अन्दर चले गए थे। शेखर ने प्रगति को और शाबाशी दी और कहा कि अब वह तीन की गिनती नहीं करेगा बल्कि प्रगति को खुद अपनी गांड उस समय ढीली करनी होगी जब उसे लगता है कि बलराम अन्दर जा रहा है।



यह कह कर उसने बलराम को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया। हर बार जब बलराम को वह अन्दर करता तो थोड़ा और ज़ोर लगाता जिससे बलराम धीरे धीरे अब करीब ६ इंच तक अन्दर पहुँच गया था। प्रगति को कोई तकलीफ नहीं हो रही थी। यह उसके हाव भाव से पता चल रहा था। शेखर ने प्रगति की परीक्षा लेने के लिए अचानक बलराम को पूरा बाहर निकाल लिया और फिर से अन्दर डालने की कोशिश की। प्रगति चौकन्नी थी और उसने ठीक समय पर अपनी गांड को ढील दे कर बलराम को अपने अन्दर ले लिया। शेखर प्रगति की इस बात से बहुत खुश हुआ और उसने प्रगति की जाँघों को प्यार से पुच्ची कर दी।



अब वह बलराम से उसकी गांड चोद रहा था और अपनी उँगलियों से उसकी चूत के मटर को सहला रहा था जिससे प्रगति उत्तेजित हो रही थी और अपने बदन को ऊपर नीचे कर रही थी। कुछ देर बाद शेखर ने बलराम को धीरे से बाहर निकाला और प्रगति को पलटने को कहा। उसने प्रगति के पेट और मम्मों को पुच्चियाँ करते हुआ कहा कि उसके हिसाब से वह गांड मरवाने के लिए तैयार है।

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प्रगति ने कहा- हाँ, मैं तैयार हूँ पर शेखर के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह जनाब तो तैयार नहीं हैं, लाओ इन्हें मैं तैयार करूँ।



शाम के सात बज रहे थे। अभी एक घंटा और बचा था। प्रगति की उत्सुकता देख कर उसका मन भी गांड मारने के लिए डोल उठा। उसके लंड पर प्रगति की जीभ घूम रही थी और उसके हाथ शेखर के अण्डों को टटोल रहे थे। साथ ही साथ गोली का असर भी हो रहा था।



थोड़ी ही देर में शेखर का लंड ज़ंग के लिए तैयार हो गया। पहली बार गांड में घुसने की उम्मीद में वह कुछ ज़्यादा ही बड़ा हो गया था। प्रगति ने उसके सुपारे को चुम्बन दिया और शेखर के इशारे पर पहले की तरह उलटी लेट गई। शेखर ने उसके कूल्हे थोड़े और ऊपर की ओर उठाये और टांगें और खोल दी। प्रगति का सिर उसने तकिये पर रखने को कहा और छाती को बिस्तर पर सटा दिया। अब उसने प्रगति की गांड की अन्दर बाहर जेली लगा दी और अपने लंड पर भी उसका लेप कर दिया। शेखर ने पीछे से आ कर अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर टिकाया और प्रगति को पूछा कि क्या वह तैयार है ।



प्रगति तो तैयार ही थी। शेखर ने धीरे धीरे लंड को अन्दर डालने के लिए ज़ोर लगाया पर कुछ नहीं हुआ। एक बार फिर सुपारे को छेद की सीध में रखते हुए ज़ोर लगाया तो लंड झक से फिसल गया और चूत की तरफ चला गया। शेखर ने एक बार कोशिश की पर जब लंड फिर भी नहीं घुसा तो उसने फिर से बलराम का सहारा लिया। बलराम को जेली लगा कर फिर से कोशिश की तो बलराम आराम से अन्दर चला गया। बलराम से उसकी गांड को ढीला करने के बाद एक और बार शेखर ने अपने लंड से कोशिश की।



पर उसका लंड बलराम से थोड़ा बड़ा था और वह प्रगति को दर्द नहीं पहुँचाना चाहता था शायद इसीलिए वह ठीक से ज़ोर नहीं लगा रहा था। प्रगति ने मुड़ कर शेखर की तरफ देखा और कहा- मेरी चिंता मत करो। मुझे अभी तक दर्द नहीं हुआ है। तुम थोड़ा और ज़ोर लगाओ और मैं भी मदद करूंगी।

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शेखर को और हिम्मत मिली और इस बार उसने थोड़ा और ज़ोर लगाया। उधर प्रगति ने भी अपनी गांड को ढीला करते हुए पीछे की तरफ ज़ोर लगाया। अचानक शेखर का लंड करीब एक इंच अन्दर चला गया। पर इस बार प्रगति की चीख निकल गई। इतनी तैयारी करने के बाद भी शेखर के लंड के प्रवेश ने प्रगति को हिला दिया।



शेखर को चिंता हुई तो प्रगति ने कहा- अब मत रुकना।



शेखर ने लंड का जो हिस्सा बाहर था उस पर और जेली लगाई और लंड को थोड़ा सा बाहर खींच कर एक और ज़ोर लगाया।



प्रगति ने भी पीछे के तरफ ज़ोर लगाया और शेखर का लंड लगभग पूरी तरह अन्दर चला गया। प्रगति थोड़ा सा हिली पर फिर संभल गई। शेखर से ज़्यादा प्रगति के कारण उन्हें यह सफलता मिली थी।



अब शेखर को अचानक अपनी सफलता का अहसास हुआ। उसका लंड इतनी टाइट सुरंग में होगा उसको अंदाजा नहीं था। उसे बहुत मज़ा आ रहा था। ख़ुशी के कारण उसका लंड शायद और भी फूल रहा था जिस से उसकी टाइट गांड और भी टाइट लग रही थी।



थोड़ी देर इस तरह रुकने के बाद उसने अपने लंड को हरकत देनी शुरू की। उसका लंड तो चूत का आदि था जिसमें अन्दर बाहर करना आसान होता है। गांड की और बात है। इस टाइट गुफा में जब उसने लंड बाहर करने की कोशिश की तो ऐसा लगा मानो प्रगति की गांड लंड को अपने से बाहर जाने ही नहीं देना चाहती। फिर भी शेखर ने थोड़ा लंड बाहर निकाला और जितना बाहर निकला उस हिस्से पर जेली और लगा ली। अब धीरे धीरे उसने अन्दर बाहर करना शुरू किया। बाहर करते वक़्त थोड़ा तेज़ और अन्दर करते वक़्त धीरे-धीरे की रफ्तार रखने लगा।



उसने प्रगति से पूछा- कैसा लग रहा है?



तो प्रगति ने बहुत ख़ुशी ज़ाहिर की। उसे वाकई बहुत मज़ा आ रहा था। उसने शेखर को और ज़ोर से चोदने के लिए कहा। शेखर ने अपनी गति बढ़ा दी और उसका लंड लगभग पूरा अन्दर बाहर होने लगा।



शेखर की तेज़ गति के कारण एक बार उसका लंड पूरा ही बाहर आ गया। अब वह इतनी आसानी से अन्दर नहीं जा रहा था जितना चूत में चला जाता है। उसने फिर से गांड में और लंड पर जेली लगाई और फिर पूरी सावधानी से लंड को अन्दर डाला। एक बार फिर प्रगति की आह निकली पर लंड अन्दर जा चुका था। शेखर ने फिर से चोदना शुरू किया। उसके लंड को गांड की कसावट बहुत अच्छी लग रही थी और उसे प्रगति के पिछले शरीर का नज़ारा भी बहुत अच्छा लग रहा था।



अब उसने प्रगति को आगे की ओर धक्का देते हुए बिस्तर पर सपाट लिटा दिया। वह भी उसके ऊपर सपाट लेट गया। प्रगति पूरी बिस्तर पर फैली हुई थी। उसकी टांगें और बाजू खुले हुए थे और उसके चूतड़ नीचे रखे तकिये के कारण ऊपर को उठे हुए थे। शेखर का पूरा शरीर उसके पूरे शरीर को छू रहा था। सिर्फ चोदने के लिए वह अपने कूल्हों को ऊपर नीचे करता था और उस वक़्त उनके इन हिस्सों का संपर्क टूटता था।



 शेखर ने अपने हाथ सरका कर प्रगति के बदन के नीचे करते हुए दोनों तरफ से उसके मम्मे पकड़ लिए। शेखर का पूरा बदन कामाग्नि में लिप्त था और उसने इतना ज्यादा सुख कभी नहीं भोगा था। उधर प्रगति ने भी इतना आनंद कभी नहीं उठाया था। उसके नितम्ब रह-रह कर शेखर के निचले प्रहार को मिलने के लिए ऊपर उठ जाते थे जिससे लंड का समावेश पूरी तरह उसकी गांड में हो रहा था। दोनों सातवें आसमान पर पहुँच गए थे।

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अब शेखर चरमोत्कर्ष पर पहुँचने वाला था। उसके मुंह से मादक आवाजें निकलने लगी थी। प्रगति भी अजीब आवाजें निकल रही थी। शेखर ने गति तेज़ करते हुए एक बार लंड लगभग पूरा बाहर निकाल कर एक ही वार में पूरा अन्दर घुसेड़ दिया, प्रगति की ख़ुशी की चीख के साथ शेखर की दहाड़ निकली और शेखर का वीर्य फूट फूट कर उसकी गांड में निकल पड़ा। प्रगति ने अपनी गांड ऊपर की तरफ दबा कर उसके लंड को जितनी देर अन्दर रख सकती थी रखा। थोड़ी देर में शेखर का लंड स्वतः बाहर निकल गया और प्रगति की पीठ पर निढाल पड़ गया।



दोनों की साँसें तेज़ चल रही थी और दोनों पूर्ण तृप्त थे। शेखर ने प्रगति को उठा कर अपने सीने से लगा लिया। उसके पूरे चेहरे पर चुम्बन की वर्षा कर दी और कृतज्ञ आँखों से उसे निहारने लगा।


प्रगति ने भी घुटनों के बल बैठ कर शेखर के लिंग को पुचकारा और और धन्यवाद के रूप में उसको अपने मुँह में ले कर चूसने लगी। उसकी आँखों में भी कृतज्ञता के आँसू थे। दोनों एक बार फिर आलिंगनबद्ध होते हुए बाथरूम की तरफ चले गए।

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The End :dance: :dance: :dance: :dance: