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Wednesday, July 31, 2019

शादी के बाद पुराने यार से चुदाई (Shadi Ke Bad Ki Purane Yaar Se Chudai) -Xstoryhindi

हैलो फ्रेंड्स, मैं जेसिका क्लार्क एक बार फिर से उपस्थित हूँ अपनी नई सेक्स कहानी के साथ. मेरी उम्र 25 साल है, नवम्बर में ही मेरी शादी हुई है, मेरे पति अमेरिकन हैं. शादी के बाद ही मैं अमेरिका चली गई थी.

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अब मैं मुख्य घटना पर आती हूँ, मेरी शादी को 20 दिन ही हुए थे और हम दोनों हर रात चुदाई का मज़ा भी ले रहे थे. उसी समय मेरे पति को सर्दी और बुखार हो गया, इस वजह से उन्होंने और मैंने सेक्स से थोड़ा दूरी बना ली. पर उनकी तबियत थोड़ी और बिगड़ गई.
                                             
लगभग एक महीने में उनकी तबियत ठीक हुई, पर बुखार की वजह से उनमें थोड़ी कमजोरी आ गई थी. हालांकि इस दौरान इन्होंने काम पर जाना बन्द नहीं किया था क्योंकि वो भी बहुत जरूरी है.
hot group sex kahaniइधर दो महीने से हम दोनों ने भी सेक्स नहीं किया था. मैं भी सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी और मेरे हस्बैंड भी. लेकिन अभी पूरी तरह से स्वास्थ्य ठीक न हो पाने के कारण हम दोनों ने अभी सेक्स करना ठीक नहीं समझा.
इस तरह कुछ दिन और निकल गए, अब मुझे भी अपने देश वापस आना था. पर कुछ डाक्यूमेंट्स की प्रॉब्लम हो गई थी, इसलिए वापस आने में समय लग गया. जब डाक्यूमेंट्स प्रॉब्लम सॉल्व हो गई तो उसके बाद मैं इंडिया आ गई.
अभी कुछ ही दिन पहले मैं इंडिया आई हूँ और सबसे पहले मैं अपने पेरेंट्स के पास आई, जहाँ वो रहते हैं.
कुछ दिन बाद मेरे दूसरे घर जहाँ मैं रहती हूँ, वहां गई. घर पर पहुँचते ही मुझे मेरी किरायदार मिली, जो अकेले ही रहती हैं. वो उस वक्त कहीं पर जा रही थी.
उसके बाद मैंने कुछ देर रेस्ट किया और रात परीक्षित के पास गई.. चिंटू भी उनके साथ ही बैठे थे. उन्हें देखते ही मेरे पूरे बदन में आग लग गई, पर खुद को मैंने सम्भाला. परीक्षित भी बहुत हट्टे कट्टे दिख रहे थे. मुझे भी चुदाई की इच्छा हो रही थी. मैंने उनसे चुदाई की बात भी की, पर उन्होंने अगले दिन बताया कि वो 4-5 दिन के लिए गोवा जा रहे हैं, चिंटू का कोई काम है.
मैंने भी साथ चलने के लिए थोड़ी ज़िद की और थोड़ा मनाया भी, उन्होंने भी हाँ कह दिया. चिंटू ने जल्दी ही फोन लगाकर तैयार होने के लिए बोल दिया. उन्हें कोई जल्दी वाला काम था.
मैंने सामान की पैकिंग तो ही कर ली थी, उसके बाद हम घर से गोवा के लिए चल दिए. हमें शाम को ट्रेन से जाना था तो हमने खाने का पूरा बंदोबस्त कर रखा था. ट्रेन में कुछ देर बाद टीसी भी आ गया, टिकट देखने के बाद टीसी चला गया और चिंटू और परीक्षित थकान की वजह से जल्दी सो गए.
मैं भी परीक्षित के ऊपर ही सो गई क्योंकि मेरा लगाव भी परीक्षित से भी ज्यादा है. लेकिन बर्थ छोटी थी, जिस वजह से परीक्षित को थोड़ी सी समस्या हो रही थी. चिंटू ऊपर की बर्थ पर सो रहा था, जो मुझे मिली थी, क्योंकि और कोई भी आने वाला नहीं था तो नीचे की बर्थ मैंने ले ली. पर मुझे अभी नींद नहीं आ रही थी और परीक्षित भी मेरी टी-शर्ट को ऊपर करके मेरी नंगी पीठ को सहला रहे थे. पता नहीं कब परीक्षित को नींद आ गई, जब वो सो गए तो मैं भी मेरी बर्थ पर जाकर सो गई.
सुबह जल्दी ही हमारी नींद खुल गई, जब हम गोवा पहुंचे, उस समय सुबह बज रहे थे. सबसे पहले हम रूम पर पहुंचे जो चिंटू के ही दोस्त का था और जहाँ मैं पहले भी बहुत बार आई हूँ और चुदी भी हूँ.
फ्रेश होने, नहाने और नाश्ता करने के बाद हम तीनों ही चिंटू के काम के लिए निकल पड़े. चिंटू का काम होने के बाद होटल में हम खाना खाने के लिए रुके. खाना खाने के बाद हम तीनों फिर से रूम में पहुंचे. पर सुबह उठने से लेकर ही मुझे तो सिर्फ चुदाई की ही याद आ रही थी, पता नहीं ये दोनों मेरी चुदाई कब करेंगे.
जैसे ही हम रूम में पहुँचे मैं कपड़े बदलने लगी, जब कपड़े बदल लिए तो उन्होंने मुझसे दरवाजा लगाने के लिए बोला. जैसे ही मैं दरवाजा लगाकर आई तो तुरन्त ही परीक्षित ने मुझे कसकर पकड़ा और किस करने लगे.
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मैं यह हमला सम्भाल नहीं पाई, तभी चिंटू ने भी मेरी लोअर और पेंटी नीचे कर मेरी गांड को चाटना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद मैं भी नॉर्मल हो गई और मैंने खुद ही मेरी टी-शर्ट और ब्रा निकाल दी. चिंटू को, जो मेरी गांड को चाट रहा था. उनको खड़ा किया और किस करने लगी. इस दौरान मैंने परीक्षित से अपनी चुदासी चूत चटवाई. मैं ये सब खड़े खड़े ही कर रही थी.
मैं कुछ देर में ही बहुत गर्म हो गई, तभी उन्होंने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दिया और दोनों मेरे मम्मों को चूसने लगे.
तभी मैंने दोनों की टी-शर्ट को निकाल दिया और पेंट उन दोनों ने खुद ही निकाल दी.
उन दोनों के लंड को एक साथ मैंने हाथ में ले लिया. लगभग 4 महीने बाद उन दोनों के लंड को देखा और छुआ, जिससे मुझे एक अलग ही सुकून मिल रहा था.
पहले तो मैंने इन दोनों के लंड को चूमा और तुरन्त ही लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी क्योंकि मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था. एक तरफ मैं दोनों के लंड चूस रही थी, तो दूसरी तरफ ये दोनों मेरे दोनों मम्मों को मसल रहे थे. उन्होंने मेरे दोनों मम्मों मसल मसल कर एकदम लाल कर दिए. जब उनके लंड बिल्कुल सख्त हो गए तो उन्होंने खुद ही एक साथ मेरी चूत और गांड में लंड डाल दिया.
परीक्षित ने कहा- आज 4 महीनों की कमी एक बार में ही पूरी करेंगें.
मैं कुछ नहीं बोली और उन्होंने धक्के लगाने शुरू कर दिए. दो महीने बाद मेरी चुदाई हो रही थी तो मेरी चूत और गांड भी थोड़ी सिकुड़ गई थी और थोड़ा दर्द भी हो रहा था, पर मज़ा भी बहुत आ रहा था.
मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सीत्कार कर रही थी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह आहह्ह्ह चोदो मुझे.. और चोदो फाड़ दो.. मेरी चूत और गांड को.. चार महीने से तुम्हारे लंड की प्यासी हूँ.. आहह्ह्ह यईआह.. उह्ह्म्म्माआ..
धीरे धीरे उन्होंने धक्के लगाने तेज कर दिए. तेज धक्कों के साथ मेरा दर्द भी बढ़ रहा था, तो मैंने चिंटू के सीने को बिल्कुल मम्मों की तरह कसकर पकड़ लिया.
उसके मुँह से सीईईईईई की आवाज निकली तो मैंने उन्होंने और भी तेज मसलना शुरू कर दिया.
अब उसने भी तेज धक्के लगाना शुरू कर दिए. मेरा दर्द और मजा दोनों बढ़ रहे थे, पर दर्द होने की वजह से आँसू भी निकल रहे थे.
मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि थोड़ी देर में ही झड़ गई, मेरे झड़ते ही चिंटू ने परीक्षित से जगह बदलने के लिए बोला.
उन दोनों ने मेरी चूत से और गांड से लंड को बाहर निकाला और दोनों ने ही एक एक करके मेरे मुँह को चोदा. पहले परीक्षित ने मेरे मुँह को चोदा और उसके बाद चिंटू ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया. चिंटू का लंड मेरी चूत के रस से गीला हो रहा था तो उसके लंड को चूसने में अलग ही स्वाद आ रहा था, पर मज़ा भी आ रहा था.
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कुछ देर बाद परीक्षित ने अपने लंड को मेरी चूत में डाला और फिर चिंटू ने गांड में पेल दिया.
अब एक बार फिर से मेरी चूत और गांड एक साथ चुदने के लिए तैयार थी और दोनों ने ही धक्के लगाने शुरू कर दिए.
मैं एक बार फिर से सीत्कारने लगी- आह्ह्ह्ह आहह्ह्ह.. आआ आअह्हह्ह ह्ह चोद दो.. मेरी चूत.. मेरी दो महीनों की प्यास भी बुझा दो, बहुत तड़पी थी तुम दोनों के लंड के लिए.. आअह्ह्ह आहह्ह्ह..
तभी कुछ देर बाद परीक्षित ने चिंटू से धक्के बन्द करने के लिए कहा. चिंटू ने भी वैसा ही किया. तभी परीक्षित और चिंटू ने मुझे कसकर पकड़ लिया और परीक्षित अचानक तेज स्पीड से मेरी चूत को चोदने लगे. मेरी जैसे ही दर्द से चीख निकली, चिंटू ने तुरन्त मेरे मुँह को बन्द कर दिया, जिससे मेरी चीख ज्यादा नहीं निकल पाई.
कुछ देर ऐसे ही मुझे बहुत स्पीड के साथ चोदते रहे, बीच बीच में उनका लंड भी फिसला, पर उन्होंने फिर से मेरी चूत में डालकर मेरी चूत को चोदा.
जब तक मैं दूसरी बार नहीं झड़ी, तब तक परीक्षित मुझे ऐसे ही चोदते रहे. बीच बीच में चिंटू भी मेरी गांड को चोद रहा था.
जब मेरी चूत ने दूसरी बार पानी छोड़ा उसके बाद दोनों ने ही उनके लंड को बाहर निकाल लिया.. अब मुझे भी ठंडक मिल रही थी. उसके बाद परीक्षित मेरी चूत को चाटने लगे, जो मेरी चूत से रस निकल रहा था, इन्होंने उसे भी चाट लिया.
चिंटू मुझे किस करने लगा. पता नहीं क्यों जब भी परीक्षित मेरी चूत को चाटते हैं, मुझे तो जैसे जन्नत मिल जाती है. उनके चूत चाटने के साथ साथ मैं भी एक हाथ से चिंटू के बदन को सहला रही थी और दूसरे हाथ से मेरी चूत को ऊपर से ही मसल रही थी. साथ ही ये दोनों मेरे एक एक चूचे को भी मसल रहे थे.
तभी चिंटू ने मेरे हाथ से अपने लंड को अलग किया और मेरे जिस दूध को वो मसल रहा था, उसे पीना शुरू किया और फिर मुझे किस करने लगा.
तभी अचानक ही मेरी कमर अपने आप ऊपर हो गई और मेरी चूत ने पानी निकाल दिया. मैं सिसकारी भी नहीं निकाल पाई क्योंकि चिंटू ने मुझे और मेरे होंठों को उनके होंठों से अलग ही नहीं होने दिया. मेरे झड़ने के बाद भी परीक्षित मेरी चूत को चाटते रहे और फिर से मेरी चूत का पानी भी पी गए.
उसके बाद चिंटू ने परीक्षित को धक्का देकर अलग किया, यह देखकर मुझे हँसी आ गई और परीक्षित भी मुस्कुरा दिए.
तभी मैंने परीक्षित को मेरी तरफ खींचकर उन्हें किस करने लगी और चिंटू से मेरी चूत को चटवाने लगी.
पर चिंटू मेरी चूत को चूसने और चाटने के साथ साथ अपनी उंगली से मेरी चुत को चोद भी रहा था. चिंटू भी आज मेरी चूत के साथ खेल ज्यादा रहा था.
कुछ ही देर में मैं एक बार और झड़ गई और इस बार चिंटू भी मेरी चूत का सारा रस पी गया. दोनों ही चूत का रस आसानी से पी जाते हैं, ये उनके लिए कोई नई बात नहीं है.
तभी चिंटू ने मेरी चूत को चाटना छोड़ दी और अपने लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया. मैं उसके लंड को सहला रही थी.
तभी मैंने परीक्षित को भी, जो मुझे किस कर रहे थे, उन्हें अपने से अलग किया और उनके भी लंड को सहलाने लगी. उन दोनों के लंड अभी आधे ही खड़े हुए थे तो मैं उनके लंड को बारी बारी मुँह में लेकर चूस रही थी.
तभी चिंटू मेरा मुँह पकड़ कर मेरा मुँह चोदने लगा. उसने अपने लंड से 20-25 धक्के लगाए होंगे कि अपना लंड मेरे मुँह से खींच लिया. इसके बाद परीक्षित भी मेरे मुँह को चोदने लगे.
बहुत देर तक यह सिलसिला चलता रहा. पहले 20-25 धक्के लगाकर चिंटू मेरे मुँह को चोदता, उसके बाद परीक्षित 20-25 धक्के लगाकर मेरे मुँह को चोदने लगते.
बहुत देर तक उनके इस तरह चोदने से मेरा मुँह भी दुखने लगा. मैंने उन्हें लंड को चूत में डालने के लिए कहा, तो उसके बाद वो फिर से मुझे गर्म करने में लग गए और 5 मिनट में ही मेरी चूत में और ज्यादा आग लगने लगी.
उसके बाद मैंने फिर से उनके कहने पर थोड़ी देर उनके लंड को चूसा. फिर उन्होंने भी देर नहीं की और चिंटू ने मुझे उनकी गोदी में उठा कर अपने लंड को मेरी चूत में फंसाने लगा. पर उसका लंड बार बार मेरी चूत से फिसल रहा था, तो फिर मैंने ही उसके लंड को पकड़कर मेरी चूत में डाला और फिर धीरे धीरे पूरे लंड को अपनी चूत के अन्दर तक डाल लिया.
जब चिंटू का लंड मेरी चूत के अन्दर पहुँच गया, उसके बाद परीक्षित ने भी अपने मोटे लंड को मेरी गांड में अन्दर तक पेल दिया और अब दोनों मुझे पकड़कर मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.
यह पहली बार था कि जब इस तरह से दो लंड मेरी चूत और गांड को चोद रहे थे. इस पोजीशन में उनके पूरे लंड भी मेरी चूत और गांड में अन्दर तक जा रहे थे. मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.
कभी वो दोनों मुझे उछाल उछाल कर मेरी चूत और गांड की चुदाई करते, तो कभी मुझे कसकर पकड़कर खुद धक्के लगा कर मेरे दोनों छेदों को ठोकते.
अब मैं भी थोड़ी थक चुकी थी और थोड़ी ही देर में झड़ने वाली भी थी. कुछ पलों बाद मैं झड़ भी गई और मेरी पकड़ भी ढीली हो गई.
तभी चिंटू ने परीक्षित से कहा- मुझे भी तो इसकी गांड का मजा लेने दो, तुम अकेले ही इसकी गांड का मजा ले रहे हो.. जरा तुम भी इसकी चूत को छोड़ कर मजा ले लो.
तभी मैंने भी कहा- हाँ चिंटू सही बोल रहा है. मेरी चूत भी तुम्हारे लंड की प्यासी हो रही है, प्लीज इसकी आप भी प्यास बुझा दो न..!

परीक्षित ने भी बिना कुछ बोले मुझे चिंटू की गोद से उनकी गोद में ले लिया और उनके लंड को मेरी चूत में डाल दिया. मेरी चुत तो भरपूर गीली थी, इस वजह से उनका लंड आसानी से मेरी चूत में अन्दर तक चला गया.
वहीं चिंटू ने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाते ही दो करारे धक्कों में मेरी गांड में पूरा उतार दिया. उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला होने की वजह से इतनी जल्दी मेरी गांड की दीवार को चीरता हुआ अन्दर तक पहुंच गया कि मुझे समझ ही नहीं आया.. बस यूं लगा कि कोई गरम सरिया मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर घुसता चला गया. मैं भी दर्द से चीखने ही वाली थी कि परीक्षित ने मुझे किस करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे धक्के लगाने भी शुरू कर दिए.
इस बार दोनों लंड मेरी चूत और गांड में थे, पर जब एक मेरी चूत में धक्का लगाता, तब दूसरा रुक जाता और उसके बाद दूसरा लंड धक्का मेरी गांड में लगाता. फिर कुछ देर बाद दोनों एक साथ ही धक्का लगा देते. मेरे सुख की सीमा नहीं थी.
अब मैं बहुत ज्यादा थक चुकी थी और मेरी पकड़ लगभग ढीली ही हो चुकी थी, पर चिंटू और परीक्षित ने मुझे कसकर पकड़ रखा था.
जब मैं एक बार और झड़ी, तब मैंने परीक्षित और चिंटू दोनों से उनके रस को बाहर निकालने के लिए बोली, पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया और बिना लंड को मेरी चूत और गांड से बाहर निकाले, मुझे बेड पर ले गए. जैसे तैसे मुझे बेड पर लेटाकर फिर से मेरी चूत और गांड को चोदने लगे.
पर अब मुझे मजा कम और दर्द ज्यादा हो रहा था और उनसे छोड़ने के लिए बोल रही थी.
अचानक उन्होंने धक्के लगाने की स्पीड बहुत तेज कर दी और परीक्षित ने चिंटू से कहा कि वो अब अपना लंड निकालेंगे तो चिंटू ने भी धक्के लगाना रोक दिया. परीक्षित ने मुझे बिस्तर पर लेटाकर अपने लंड को निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया.
जैसे ही उन्होंने लंड को मेरे मुँह में डाला, तुरन्त ही उन्होंने सारा रस मेरे मुँह में ही निकाल दिया. मैंने भी उनका सारा रस निगल लिया.
तभी चिंटू जो अपना वीर्य मेरे मम्मों पर गिराने को तैयार दिख रहा था, मैंने भी उसके लंड के रस को मुँह में निकालने के लिए कहा.
उसने भी मेरे मुँह में उनका वीर्य निकाल दिया. वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगा तो मैंने भी उसे मुस्कुराते हुए उसके गाल पर एक हल्की सी चपत जड़ दी. फिर मैं गांड हिलाते हुए बाथरूम में चली गई.
उसके कुछ देर बाद हमारी चुदाई का दूसरा राउंड शुरू हुआ. यह खेल 4 दिन तक चला.
चार दिन तक तो उन्होंने मेरी चूत और गांड की तो चटनी बना कर रख दी. एक दिन तो दोनों ने सिर्फ मेरी गांड चुदाई का ही मजा लिया. इन 4 दिनों में चिंटू ने भी उनका काम पूरा किया और मेरी चुदाई भी जमकर की.
उसके बाद हम घर पर आ गए. पर 4 दिन की चुदाई ने मेरी चूत और गांड की 2 महीने की प्यास नहीं बुझा पाई थी. अगले 3 दिन रेस्ट करने के बाद मेरी चूत में फिर से आग लगने लगी.
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उसके बाद क्या हुआ मैं जल्द ही लिखूंगी. मेरी अगली चुदाई की कहानी का जरा सा इन्तजार कीजिए, आपकी राय, कमेंट्स मुझे मेल करें और प्लीज़ फ़ोटो, मोबाइल नम्बर, फेसबुक आईडी न मांगे.

शादी का मंडप और चुदाई (Shadi Ka Mandup Aur Chudai ) -Xstoryhindi

दोस्तो, मैं सविता सिंह …
मैं अपने पति के साथ राजस्थान के एक गाँव में गई और वहाँ मैंने एक बिल्कुल ही अंजान आदमी से एक नहीं कई बार सेक्स किया और बार बार सेक्स किया।
मेरा सबसे यादगार सेक्स तब हुआ जब एक तरफ मंडप में लड़की फेरे ले रही थी, और दूसरी तरफ मैं अपनी चुदाई करवा रही थी, उसी गैर मर्द शेर सिंह से।
कैसे? लीजिये पढ़िये:




अगले दिन शादी थी, तो सब तरफ चहल पहल ज़्यादा थी। सुबह से न मेरे पति, न शेर सिंह कोई भी नहीं दिखा। मैं पहले तो सुबह तैयार हुई, मगर दोपहर तक शेर सिंह का कोई पता नहीं। अब उसकी बीवी वहीं थी, मगर उससे भी नहीं पूछ सकती थी।
लोग आए और उन्होंने दोपहर के बाद मंडप भी सजा दिया। शाम के 5 बज गए थे, वैसे तो फेरे रात के 1 बजे के बाद थे, मगर फिर भी घर में औरतों ने शोर मचा रखा था।
मैं एक तरफ बैठी सब देख रही थी, सुन रही थी और जल भुन रही थी कि साला मेरा कोई इंतजाम ही नहीं हो रहा।

इंतज़ार करते करते जब मैं थक गई तो मैं और चंदा दोनों कमरे में बैठी थी, तभी उसकी ब्यूटीशियन आ गई, जिसने चंदा को तैयार करना था, उसने चंदा को तैयार किया तो साथ में मुझे भी मेकअप करके सजा दिया।
मगर दिक्कत यह हुई कि मुझे बहुत से औरतों ने ये कॉम्प्लिमेंट दिया कि मैं दुल्हन से भी ज़्यादा सुंदर लग रही हूँ। मेरे आसपास से जो भी मर्द गुज़रे, उनकी आँखों में भी मेरे रूप के लिए मूक प्रशंसा थी, कुछ एक आँखों में तो मैंने कामुकता भी महसूस करी, जैसे कह रहे हों ‘आज अगर ये मिल जाए तो साली की फाड़ कर रख दूँ।’

मेरे पति जब मुझसे मिले तो उन्होंने भी कहा- आज तो बहुत गजब ढा रही हो, लगता है आज सुहागरात मनानी ही पड़ेगी।
उनका मतलब साफ था कि बहुत जल्द वो मुझसे सेक्स करेंगे.
मगर क्या मैं भी उनसे सेक्स करने को उतावली थी?
मेरा जवाब था, बिल्कुल भी नहीं!
मैं तो शेर सिंह को खोज रही थी, वो मिल जाए और अपने खुरदुरे लंड से मेरी काम पिपासा बुझाये।

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कुछ देर बाद वो भी दिख गया, सफ़ेद शेरवानी, और चकाचक सफ़ेद कुर्ता पाजामा, सर सुर्ख पगड़ी, लंबा सा लंड आगे को छोड़ा हुआ। अपने कद काठी और बड़ी बड़ी मूँछों के कारण वो पूरा कोई रजवाड़े का मालिक लग रहा था।
जब उसने मुझे देखा तो इशारे से एक तरफ बुलाया। मैं गई तो बोला- सविता जी, लगता है आप मेरा तलाक करवा कर ही दम लोगी।
मैं उसका आशय समझ तो गई, पर अंजान बन कर बोली- क्यों क्या हुआ, आपकी पत्नी को हमारा पता चल गया क्या?
वो हंस कर बोला- अरे नहीं, आप आज इतनी सुंदर लग रही हैं कि दिल करता है, अपनी पत्नी को तलाक दे कर आपसे ही शादी कर लूँ।आप इस कहानी को HotSexStory.Xyz में पढ़ रहे हैं।

मैंने कहा- तो देर किस बात की है, शादी का मंडप तो सजा ही हुआ है, कर लेते हैं शादी!
वो मेरी आँखों में गहरा झांक कर बोला- क्या तुम छोड़ सकती हो अपने पति को?
बेशक ये मेरे लिए मुश्किल था, मगर मैं झूठ ही कह दिया- हाँ, छोड़ दूँगी।

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उसके चेहरे पर जैसे खुशी, परेशानी और ना जाने क्या क्या भाव उभरे।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोला- आपने धर्म संकट में डाल दिया। सच में सविता जी, मैं आपसे बहुत प्यार करने लगा हूँ, अब आपके बिना नहीं रह सकता। चलो देखता हूँ, अगर मेरा जुगाड़ फिट बैठा तो मैं अपनी पत्नी को छोड़ दूँगा।
मैं उसके विचार सुन कर थोड़ा विचलित हुई- अरे अरे, शेर सिंह जी, इतनी जल्दी क्या है, अभी देखते हैं, हमारा रिश्ता और कितना आगे बढ़ता है, उसके बाद सोच लेंगे। आप भी यही हैं, मैं भी यहीं हूँ।

वो परेशान हो कर बोला- क्या खाक यहीं हो, आपके पति ने परसों वापिस जाने का प्रोग्राम फिक्स कर लिया, मेरे सामने अपने ताऊजी से बात कर रहा था। परसों आप चली जाओगी, फिर क्या बात होगी हमारी?
मैंने कहा- पर अभी तो परसों जाना है न, परसों तक तो हम अपने इस प्यार भरे रिश्ते का मज़ा ले सकते हैं।
वो बोला- तो ठीक है, आप भी आज दुल्हन बनी हैं, मैं भी आज पूरा सजधज कर आया हूँ, तो आज हम सबके होते हुये प्यार करेंगे।
मैंने कहा- वो कैसे?
वो बोला- बता दूँगा, बस मेरे इशारे का इंतज़ार करना।

उसके बाद हम सब शादी में मसरूफ़ हो गए, मैं चंदा के साथ उसकी बेस्ट फ्रेंड का रोल निभा रही थी, मगर हर कोई दुल्हन को छोड़ मुझे ही घूर रहा था, क्या औरत क्या मर्द, क्या बच्चा क्या बूढ़ा। रात के 12 बज कर 50 मिनट का फेरों का टाईम था। घूमते फिरते, नाचते गाते, खाते पीते, बड़ी मुश्किल से शुभ समय आया। जब दूल्हा दुल्हन विवाह मंडप में बैठ गए और पंडित ने मंत्र- उच्चारण शुरू कर दिया तो शेर सिंह ने मुझे इशारा किया। मैं भी चुपके से उठ कर चल दी।
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वो मुझे अपने पीछे पीछे सीढ़ियाँ चढ़ा कर घर की बिल्कुल ऊपर वाली छत पर ले गया। वहाँ से नीचे सारा विवाह मंडप, सभी लोग दिख रहे थे।
ऊपर ले जा कर शेर सिंह बोला- अब पंडित के मंत्रोउच्चार के साथ हम भी फेरे लेंगे।
मैंने कहा- तो क्या हम चोरी से शादी करेंगे, घर वालों की मर्ज़ी के खिलाफ?
वो बोला- हाँ, और जब सही वक़्त आएगे, तो सबके सामने भी शादी करेंगे।
मैंने कहा- शेर सिंह जी, आप तो सच में मेरे दीवाने हो गए हो। 

उसने मुझे बांहों में कस लिया और बोला- सविता जी, आप नहीं जानती कि मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ, अगर जान भी देनी पड़ी आपके लिए तो दे दूँगा।
बेशक मेरे मन में शेर सिंह के लिए ऐसी कोई प्रेम प्यार की भावना नहीं थी क्योंकि मैं तो सिर्फ उसके सेक्स के रिश्ते तक ही खुद को सीमित रखा था। मगर वही था जो इस रिश्ते को चूत की गहराई से दिल की गहराई तक ले गया था।

और वैसे यहाँ ऊपर छत पर भी हमें किसने देखना था, तो जैसे जैसे नीचे पंडित मंत्र पढ़ पढ़ कर चंदा की शादी करवाता रहा, वैसे वैसे ही मैंने और शेर सिंह ने पूरे सात फेरे लिए, उसने अपनी तरफ से लाया हुआ मंगलसूत्र भी मेरे गले में डाला, मेरी मांग में सिंदूर भी भरा।
एक तरह से देखा जाए तो मैं उसकी पत्नी हो चुकी थी।

फेरों के बाद और कोई रस्म हमने नहीं की, जबकि नीचे मंडप में बहुत सी रस्में चल रही थी। मैंने भी नीचे झुक कर शेर सिंह के पाँव छूये, उसने मुझे उठा कर अपने सीने से लगा लिया।
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कितनी देर वो मुझे अपने सीने से चिपकाए खड़ा रहा।
मैंने ही कुछ देर बाद उससे पूछा- क्या हुआ जी?
वो बोला- कुछ नहीं, बस अपनी किस्मत को देख रहा था कि कितनी सुंदर पत्नी मिली है मुझको!

मैंने अपना चेहरा उठा कर उसकी ओर देखा तो उसने मेरे होंटों को चूम लिया। एक, दो, तीन, चार और फिर तो उसने जैसे झड़ी ही लगा दी चुंबनों की।
मैं भी खुश थी, मैं भी चुंबनों में उसका साथ देने लगी।

चूमते चूमते मेरे तो बदन में हलचल होने लगी और मैंने महसूस किया कि शेर सिंह का पाजामा भी टाईट होने लगा था। मैंने ही हाथ आगे बढ़ाया और पाजामे में ही उसका लंड पकड़ लिया।
उसने मेरी आँखों में देखा और पूछा- चाहिए?
मैंने हाँ में सर हिलाया।

उसने मेरे लहंगे के ऊपर से ही मेरे दोनों चूतड़ सहलाए और मुझे घुमा दिया, मेरा चेहरा पंडाल की तरफ कर दिया। मैंने छतरी के बने हुये दो खंबों का सहारा लिया तो शेर सिंह ने पीछे से मेरे सारा घागरा उठा कर मेरी कमर पे रख दिया। मैं थोड़ा सा और आगे को झुक गई ताकि मेरी गांड और शेर सिंह की तरफ हो जाए, और मैं अपनी टाँगें भी खोल कर खड़ी हो गई।
शेर सिंह ने अपना पायजामे का नाड़ा खोला, और अपना पाजामा और चड्डी नीचे को सरका दी, अपने लंड पर हल्का सा थूक लगाया और पीछे से मेरी चूत में धकेल दिया। मोटा खुरदुरा सा टोपा मेरी चूत में थोड़ा अटक कर घुसा, मुझे हल्की से तकलीफ हुई, मगर फिर भी अच्छा लगा।
ऊपर से मैं पूरी शादी को देख रही थी, मैंने देखा मेरे पति भी वहीं घूम रहे हैं, एक दो औरतों से जैसे उन्होंने मेरे बारे में पूछा, मैंने ऊपर से चिल्ला कर कहा- अजी मैं यहाँ हूँ, ऊपर!
मगर शादी के शोर शराबे में चौथी मंज़िल की आवाज़ नीचे कहाँ सुनती।

शेर सिंह मुझे चोदता रहा और मैं ऊपर से यूं ही अपनी मज़ाक में अपने पति को और बाकी सबको शादी में घूमते फिरते देखती रही। मेरे लिए शादी नहीं, सेक्स महत्त्वपूर्ण था, और शेर सिंह नहीं उसका लंड महत्त्वपूर्ण था।शेर सिंह ने अपना पायजामे का नाड़ा खोला, और अपना पाजामा और चड्डी नीचे को सरका दी, अपने लंड पर हल्का सा थूक लगाया और पीछे से मेरी चूत में धकेल दिया. आप इस कहानी को Xstorryhindi में पढ़ रहे हैं।
शेर सिंह मुझे बड़े अच्छे से चोदा और अपना माल मेरी चूत के अंदर ही गिराया। जब वो झड़ गया तो हम चुपचाप नीचे उतर आए।
मगर रास्ते में मैंने शेर सिंह को कह दिया- अभी एक बार से मेरा मन नहीं भरा है, मुझे ये सब फिर से चाहिए.
मैंने कहा तो शेर सिंह बोला- चिंता मत करो मेरी जान, आज सारी रात मैं तुम्हारे साथ हूँ, जितनी बार कहोगी, मैं उतनी बार तुम्हें संतुष्ट करूंगा।

अभी मैं एक बार और सेक्स करना चाहती थी, मगर शेर सिंह नहीं माना तो मैं मजबूरन उसके साथ नीचे आ गई। उसके बाद मैं अपने पति से मिली, तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया- अरे कहाँ चली गई थी मेरी जान, मैं तो बहुत मिस कर रहा था तुम्हें!
उन्होंने मुझे गले से लगा कर मुझे कसा, तो शेर सिंह के वीर्य मेरी चूत से चू कर मेरे घुटनों तक जाता मुझे महसूस हुआ। मैंने भी उन्हें थोड़ा कस कर आलिंगन किया और बोली- अरे क्या बताऊँ, मुझे तो चंदा के काम से फुर्सत नहीं मिल रही, कभी ये करो, कभी वो करो।

मेरे पति बोले- तो यार फ्री कब होगी, मेरा दिल कर रहा है, तुम्हें किसी अकेली जगह लेजा कर खूब प्यार करूँ।
मैंने कहा- रुको एक मिनट मैं आती हूँ।

अपने पति को छोड़ कर मैं सीधी बाथरूम में गई, पहले मैंने अपनी चूत को अच्छे से पानी से धोया और फिर कपड़े से सुखाया। शेर सिंह के पहनाया मंगल सूत्र उतार कर बाथरूम में ही रख दिया। और फिर से फ्रेश होकर बाहर आई।
मैंने अपने पति का हाथ पकड़ा और उन्हें वहीं ऊपर शिखर पर ले गई। वहाँ जाकर मैंने उनको गले से लगा लिया। सबके बीच, सबसे दूर ऐसी जगह देख कर मेरे पति बहुत खुश हुये- अरे वाह, क्या जगह ढूँढी है, यहाँ तो हम सबको देख सकते हैं पर हमे कोई नहीं देख सकता।

मगर मैंने बात करने की बजाए अपना घागरा ऊपर उठाया, और फिर से उसी जगह उसी पोज में आ गई, मेरे पति ने मेरी हालत देखी, तो बोले- लगता है, तुम्हें भी बड़ी इच्छा हो रही थी सेक्स की?
और उन्होंने भी अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया।

कोई 5 मिनट की चुदाई चली, मगर इस चुदाई में वो मज़ा नहीं था जो शेर सिंह की चुदाई में था। पति को भी सेक्स किए काफी दिन हो गए थे, तो बस 5 मिनट में ही वो अपनी सारी गर्मी मेरी चूत में ही निकाल गए।
मुझे बेशक इस सेक्स से कोई मज़ा नहीं आया, मगर हाँ, मेरी चूत की खुजली को थोड़ा आराम आया।

उसके बाद हम दोनों नीचे आ गए।
करीब सुबह चार बजे मुझे शेर सिंह फिर से वहीं ऊपर ले गया, और इस बार उसने करीब 35 मिनट लगातार मुझे नीचे लेटा कर मुझे चोदा। क्या मस्त और क्या खूब चुदाई की मेरी। मेरा 4 बार पानी गिरा, मगर वो फिर भी डटा रहा।
करीब 35 मिनट बाद जब वो थक कर झड़ा तो मेरी चूत को पूरा भर दिया उसने अपने माल से। मैं नीचे लेटी पसीने पसीने हो रही थी, उसकी तो हालत ही बहुत बिगड़ गई थी, पगड़ी उतार दी, कपड़े उतार दिये, सांस तेज़, दिल की धड़कन तेज़।

झड़ने के बाद वो तो जैसे गिर ही गया।
मैं उठी और अपने आप को ठीक करके वापिस नीचे आ गई। उसके बाद मैं चंदा की विदाई में शामिल हो गई। फिर करीब 6 बजे अपने कमरे में सोने चली गई।

दोपहर के 12 बजे मेरे पति ने मुझे जगाया, मेरा सारा बदन जैसे टूट रहा था। उसके बाद चाय पीकर फ्रेश हो कर मैं फिर से तैयार हो कर परिवार में घुलमिल गई।
अगले दिन शेर सिंह नहीं मिला. जिस दिन हम वापिस आने वाले थे, वो मिला, अकेले में लेजा कर मुझसे बोला- आज आ जा रही हैं?
मैंने कहा- हाँ, जाना तो पड़ेगा।
वो बोला- फिर मिलोगी?
मैंने कहा- अब मिले बिना रहा भी न जाएगा।
वो बोला- ठीक है, कभी मौका लगा तो मैं भी मिलने आऊँगा आपसे।

फिर मुझे अपने गले से लगाया और कहा- आज जाने से पहले एक आखिरी बार!
कहते हुये उसने अपनी पैन्ट खोली, मुझे लगा शायद फिर से सेक्स करेगा, मैंने कहा- नहीं शेर सिंह जी, इतना टाईम नहीं है मेरे पास!
वो बोला- अरे नहीं, चोदना नहीं है, सिर्फ थोड़ा सा चूस जाओ।

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मैंने नीचे बैठ कर 1 मिनट उसका लंड चूसा। उसका काला, नाड़ीदार, खुरदुरा सा लंड फिर से खड़ा हो गया। मेरा दिल तो किया के उसका लंड चूसती ही रहूँ और आखरी बार फिर से एक बार इस से चुदवा कर जाऊँ, मगर ये संभव नहीं था।
मैं उठी और खुद ही एक बार शेर सिंह के होंठो को चूमा और दौड़ कर बाहर आ गई। शेर सिंह मेरे पीछे नहीं आया।
मैं अपने घर पहुंची, उसके बाद फिर से वही रूटीन ज़िंदगी। रात को पति से सेक्स, दिन में चाचाजी से सेक्स। मगर शेर सिंह शेर सिंह था, उसके जैसे मज़ा, और कोई नहीं दे सका मुझे।

उस रात की बात न पूछ सखी (Kavita-Us Raat Ki Baat Na Puchh Sakhi) -Xstoryhindi

उस रात की बात न पूछ सखी (Kavita-Us Raat Ki Baat Na Puchh Sakhi)

स्नानगृह में जैसे ही नहाने को मैं निर्वस्त्र हुई,
मेरे कानों को लगा सखी, दरवाज़े पे दस्तक कोई हुई,
धक्-धक् करते दिल से मैंने, दरवाज़ा सखी री खोल दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
आते ही साजन ने मुझको, अपनी बाँहों में कैद किया,
होठों को होठों में लेकर, उभारों को हाथों से मसल दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
फिर साजन ने सुन री ओ सखी, फव्वारा जल का खोल दिया,
भीगे यौवन के अंग-अंग को, होठों की तुला में तौल दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
कंधे, स्तन, कमर, नितम्ब, कई तरह से पकड़े-छोड़े गए,
गीले स्तन सख्त हाथों से, आटे की भांति गूंथे गए,
जल से भीगे नितम्बों को, दांतों से काट-कचोट लिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
मैं विस्मित सी सुन री ओ सखी, साजन के बाँहों में सिमटी रही
साजन ने नख से शिख तक ही, होंठों से अति मुझे प्यार किया
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
चुम्बनों से मैं थी दहक गई,
जल-क्रीड़ा से बहकी मैं,
सखी बरबस झुककर मुँह से मैंने,
साजन के अंग को दुलार किया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
चूमत-चूमत, चाटत-चाटत, साजन पंजे पर बैठ गए,
मैं खड़ी रही साजन ने होंठ, नाभि के नीचे पहुँचाय दिए,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
मेरे गीले से उस अंग से, उसने जी भर के रसपान किया,
मैंने कन्धों पे पाँवों को रख, रस के द्वारों को खोल दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
मैं मस्ती में थी डूब गई, क्या करती हूँ न होश रहा,
साजन के होठों पर अंग को रख, नितम्बों को चहुँ ओर हिलोर दिया
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
साजन बहके-दहके-चहके, मोहे जंघा पर ही बिठाय लिया,
मैंने भी उनकी कमर को, अपनी जंघाओं में फँसाय लिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
जल से भीगे और रस में तर अंगों ने, मंजिल खुद खोजी,
उसके अंग ने मेरे अंग के अंतिम पड़ाव तक प्रवेश किया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
ऊपर से जल कण गिरते थे, नीचे दो तन दहक-दहक जाते,
चार नितम्ब एक दंड से जुड़े, एक दूजे में धँस-धँस जाते,
मेरे अंग ने उसके अंग के, एक-एक हिस्से को फांस लिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
जैसे वृक्ष से लता सखी, मैं साजन से लिपटी थी यों,
साजन ने गहन दबाव देकर, अपने अंग से मुझे चिपकाय लिया
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
नितम्बों को वह हाथों से पकड़े, स्पंदन को गति देता था,
मेरे दबाव से मगर सखी, वह खुद ही नहीं हिल पाता था,
मैंने तो हर स्पंदन पर, दुगना था जोर लगाय दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
अब तो बस ऐसा लगता था, साजन मुझमें ही समा जाएँ,
होंठों में होंठ, सीने में वक्ष, आवागमन अंगों ने खूब किया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
कहते हैं कि जल से री सखी, सारी गर्मी मिट जाती है,
जितना जल हम पर गिरता था, उतनी ही गर्मी बढ़ाए दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
वह कंधे पीछे ले गया सखी, सारा तन बाँहों पर उठा लिया,
मैंने उसकी देखा-देखी, अपना तन पीछे खींच लिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
इससे साजन को छूट मिली, साजन ने नितम्ब उठाय लिया,
अंग में उलझे मेरे अंग ने, चुम्बक का जैसे काम किया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
हाथों से ऊपर उठे बदन, नितम्बों से जा टकराते थे,
जल में भीगे उत्तेजक क्षण, मृदंग की ध्वनि बजाते थे,
साजन के जोशीले अंग ने, मेरे अंग में मस्ती घोल दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया !!
खोदत-खोदत कामांगन को, जल के सोते फूटे री सखी,
उसके अंग के फव्वारे ने, मोहे अन्तःस्थल तक सींच दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी जब साजन ने खोली अँगिया !!
फव्वारों से निकले तरलों से, तन-मन दोनों थे तृप्त हुए,
साजन के प्यार के उत्तेजक क्षण, मेरे अंग-अंग में अभिव्यक्त हुए,
मैंने तृप्ति की एक मोहर, साजन के होठों पर लगाय दिया,
उस रात की बात न पूछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया..!!
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